घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत Domestic Violence Petition Format in Hindi प्राप्त करें। इसमें संरक्षण आदेश, निवास आदेश, मौद्रिक राहत, क्षतिपूर्ति और अंतरिम राहत के लिए याचिका का प्रारूप शामिल है।
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Domestic Violence Petition Format in Hindi
घरेलू हिंसा याचिका प्रारूप हिंदी में तैयार की गई याचिका महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत न्यायालय से उचित कानूनी राहत मांगने के लिए उपयोग की जा सकती है। इस प्रकार की याचिका में घरेलू संबंध, घरेलू हिंसा की घटनाएं, संबंधित व्यक्तियों का विवरण, उपलब्ध साक्ष्य और मांगी गई कानूनी राहतों का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है।
Domestic Violence Petition Format in Hindi में सामान्यतः अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत आवेदन तथा परिस्थितियों के अनुसार धारा 17, 18, 19, 20, 22 और 23 के तहत मांगी जाने वाली राहतों को शामिल किया जा सकता है। पीड़ित महिला द्वारा Protection Order के लिए धारा 18, Residence Order के लिए धारा 19, Monetary Relief के लिए धारा 20 और मानसिक उत्पीड़न अथवा भावनात्मक कष्ट के संबंध में Compensation के लिए धारा 22 का सहारा लिया जा सकता है। तत्काल परिस्थितियों में धारा 23 के अंतर्गत अंतरिम अथवा अंतरिम-पूर्व राहत का अनुरोध भी किया जा सकता है।
घरेलू हिंसा याचिका तैयार करते समय विवाह या घरेलू संबंध की जानकारी, घटनाओं की तारीख एवं परिस्थितियां, निवास संबंधी तथ्य, आर्थिक परिस्थितियां और उपलब्ध दस्तावेजों का उचित उल्लेख महत्वपूर्ण होता है। संबंधित साक्ष्य में संदेश, ईमेल, चिकित्सकीय दस्तावेज, पुलिस शिकायतें, बैंक रिकॉर्ड, photographs तथा अन्य प्रासंगिक दस्तावेज शामिल हो सकते हैं, यदि वे मामले के तथ्यों को प्रमाणित करते हों।
यह Domestic Violence Petition Format in Hindi एक संदर्भ प्रारूप के रूप में उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए वास्तविक न्यायालयीन आवेदन को संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और उपलब्ध कानूनी उपचारों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।
Prepared/Reviewed by:
Advocate Deepak Malhotra
Quiet Office No. 4, 35-A, Chandigarh
Mobile: 9815280500
50 Unique Domestic Violence Questions & Answers
1. क्या घरेलू हिंसा की शिकायत में हर घटना की तारीख लिखना जरूरी है?
हर घटना की सटीक तारीख उपलब्ध हो तो लिखना उपयोगी है, लेकिन प्रत्येक घटना की तारीख याद होना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में अनुमानित तारीख, महीना, वर्ष, स्थान और घटना की परिस्थितियां स्पष्ट रूप से बताई जा सकती हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं के संबंध में उपलब्ध दस्तावेज या अन्य साक्ष्य भी बताए जाने चाहिए।
2. क्या घरेलू हिंसा याचिका में वर्षों पुराने व्यवहार का उल्लेख किया जा सकता है?
हां, पुराने घटनाक्रम का उल्लेख परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है, विशेषकर जब उससे कथित उत्पीड़न या व्यवहार की पृष्ठभूमि या निरंतरता समझने में सहायता मिलती हो। हालांकि, पुराने प्रत्येक आरोप की कानूनी प्रासंगिकता उसके तथ्यों और मांगी गई राहत के आधार पर निर्धारित होगी।
3. क्या एक ही घर में अलग कमरे में रहना घरेलू हिंसा का प्रमाण है?
केवल अलग कमरे में रहना अपने आप घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं करता। यदि अलग रखने के साथ अपमान, धमकी, आर्थिक नियंत्रण, सुविधाओं से वंचित करना या अन्य abusive conduct जुड़ा हुआ हो, तो वे परिस्थितियां न्यायालय के समक्ष प्रासंगिक हो सकती हैं।
4. क्या पत्नी को घर की सुविधाएं इस्तेमाल करने से रोकना आर्थिक हिंसा हो सकता है?
परिस्थितियों के आधार पर ऐसा व्यवहार आर्थिक या अन्य प्रकार के abuse के रूप में प्रासंगिक हो सकता है। याचिका में यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-सी सुविधा रोकी गई, किसने रोकी, क्यों रोकी गई और उसका महिला पर क्या प्रभाव पड़ा।
5. क्या पत्नी को केवल बचा हुआ खाना देना घरेलू हिंसा की शिकायत में लिखा जा सकता है?
यदि ऐसा व्यवहार जानबूझकर अपमान, नियंत्रण या प्रताड़ना के रूप में किया गया है, तो उसके तथ्य याचिका में बताए जा सकते हैं। केवल एक isolated भोजन संबंधी विवाद और लगातार अपमानजनक व्यवहार के बीच अंतर न्यायालय तथ्यों के आधार पर देखेगा।
6. क्या पति द्वारा पत्नी का इंटरनेट बंद करना घरेलू हिंसा के मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है?
यदि इंटरनेट बंद करना बार-बार और जानबूझकर पत्नी के रोजगार, कार्यालयीन कार्य या आर्थिक स्वतंत्रता को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया हो, तो यह परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में प्रासंगिक हो सकता है।
7. क्या पत्नी के ऑफिस जाने पर रोक लगाने को घरेलू हिंसा की याचिका में शामिल किया जा सकता है?
यदि किसी महिला को रोजगार करने से रोकना धमकी, नियंत्रण या आर्थिक निर्भरता पैदा करने के व्यापक व्यवहार का हिस्सा है, तो संबंधित तथ्य याचिका में शामिल किए जा सकते हैं। घटना की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
8. क्या पति द्वारा पत्नी का फोन बार-बार छीनना घरेलू हिंसा के मामले में लिखा जा सकता है?
हां, यदि फोन छीनना धमकी, निगरानी, संपर्क रोकने या सहायता प्राप्त करने से रोकने के उद्देश्य से किया जाता है, तो उसका उल्लेख किया जा सकता है। संदेश, कॉल रिकॉर्ड, गवाह या अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य सहायक हो सकते हैं।
9. क्या पत्नी को अपने माता-पिता से बात करने से रोकना घरेलू हिंसा का आधार बन सकता है?
यदि ऐसा प्रतिबंध महिला को उसके परिवार से अलग-थलग करने, डराने या नियंत्रित करने का हिस्सा है, तो यह तथ्य घरेलू हिंसा की कार्यवाही में प्रासंगिक हो सकता है। याचिका में वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक है।
10. क्या पति का पत्नी को बार-बार मायके भेजने की धमकी देना याचिका में लिखा जा सकता है?
हां। यदि ऐसी धमकी लगातार दबाव, अपमान या वैवाहिक घर से बेदखल करने के प्रयास का हिस्सा है, तो उसे घटनाक्रम के रूप में शामिल किया जा सकता है।
11. क्या सास द्वारा पति को पत्नी के खिलाफ भड़काने की बात याचिका में लिखी जा सकती है?
यदि इसके समर्थन में विशिष्ट घटनाएं या परिस्थितियां हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जा सकता है। केवल सामान्य आरोप लगाने के बजाय यह बताना बेहतर है कि सास ने कब, क्या कहा या किया और उसका क्या परिणाम हुआ।
12. क्या दूसरे विवाह की धमकी घरेलू हिंसा की याचिका में महत्वपूर्ण हो सकती है?
केवल दूसरे विवाह की इच्छा व्यक्त करना अपने आप घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं करता। लेकिन यदि ऐसी बात धमकी, दबाव, अपमान या पत्नी को घर से निकालने के प्रयास के साथ जुड़ी हो, तो परिस्थितियां प्रासंगिक हो सकती हैं।
13. क्या पत्नी को जबरन तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर करवाने का प्रयास याचिका में लिखा जा सकता है?
यदि हस्ताक्षर करवाने के लिए धमकी, दबाव, intimidation या coercion का इस्तेमाल किया गया हो, तो घटना का विवरण दिया जा सकता है। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि किस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाने का प्रयास हुआ और किस प्रकार दबाव बनाया गया।
14. क्या घरेलू हिंसा याचिका में पहले हुए समझौते का उल्लेख करना चाहिए?
यदि पहले कोई लिखित समझौता, undertaking या police-level settlement हुआ था और बाद में कथित घटनाएं दोबारा हुईं, तो वह घटनाक्रम समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उपलब्ध दस्तावेज की प्रति भी परिस्थितियों के अनुसार संलग्न की जा सकती है।
15. क्या पुराने समझौते का उल्लंघन नई घरेलू हिंसा कार्यवाही में महत्वपूर्ण है?
यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि समझौते में कुछ व्यवहार दोबारा न करने का स्पष्ट आश्वासन था और बाद में उसी प्रकार की घटनाएं हुईं, तो पूर्व समझौता घटनाओं की पृष्ठभूमि समझने में उपयोगी हो सकता है।
16. क्या पत्नी अपने स्त्रीधन की पूरी सूची घरेलू हिंसा याचिका के साथ दे सकती है?
हां। आभूषण, घरेलू सामान, उपहार और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं की item-wise सूची उपयोगी हो सकती है। जहां उपलब्ध हों, bills, photographs, marriage records या अन्य ownership-related documents भी संलग्न किए जा सकते हैं।
17. क्या केवल आभूषणों की photographs स्त्रीधन साबित करने के लिए पर्याप्त हैं?
हर मामले में नहीं। photographs उपयोगी corroborative evidence हो सकती हैं, लेकिन ownership और possession से संबंधित अन्य सामग्री भी महत्वपूर्ण हो सकती है। Bills, marriage photographs, gift lists, witnesses और अन्य उपलब्ध documents परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी हो सकते हैं।
18. क्या पति के घर में रखा पत्नी का सामान वापस मांगना घरेलू हिंसा मामले में relief हो सकता है?
यदि संबंधित सामान महिला की personal property या stridhan है और उसे गलत तरीके से रोका गया है, तो facts और applicable statutory provisions के आधार पर appropriate relief मांगी जा सकती है।
19. क्या विवाह के समय दिए गए household appliances को घरेलू हिंसा याचिका में सूचीबद्ध किया जा सकता है?
हां, यदि वे मामले के तथ्य और दहेज/स्त्रीधन या संपत्ति से संबंधित विवाद का हिस्सा हैं। याचिका में वस्तु, किसने दी, कब दी और वर्तमान में किसके कब्जे में है, जैसे विवरण उपयोगी हो सकते हैं।
20. क्या पत्नी को matrimonial home से निकालने की धमकी मिलने पर वह तुरंत residence relief मांग सकती है?
उपयुक्त परिस्थितियों में महिला residence-related interim relief मांग सकती है। न्यायालय urgency, domestic relationship, shared household से संबंधित तथ्यों और उपलब्ध material को देखकर आदेश पर विचार करता है।
21. क्या मकान पति की मां के नाम होने पर भी residence relief मांगी जा सकती है?
केवल ownership से प्रश्न समाप्त नहीं हो जाता। Residence rights और property ownership अलग कानूनी प्रश्न हो सकते हैं। न्यायालय मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्णय करेगा।
22. क्या पति की संपत्ति बेचने की धमकी को Domestic Violence Petition में शामिल किया जा सकता है?
यदि ऐसी धमकी महिला को residence या अन्य अधिकारों से वंचित करने के व्यापक प्रयास से जुड़ी है, तो उसे तथ्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। संपत्ति की ownership और relief की statutory basis भी स्पष्ट करनी चाहिए।
23. क्या Domestic Violence Petition में पति की दूसरी शादी की planning का उल्लेख किया जा सकता है?
यदि उससे संबंधित विशिष्ट घटनाएं, communications या threats मौजूद हैं, तो उन्हें factual background के रूप में बताया जा सकता है। केवल अनुमान को established fact के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
24. क्या पति की WhatsApp chat घरेलू हिंसा के आरोपों को corroborate कर सकती है?
प्रासंगिक WhatsApp communications परिस्थितियों के अनुसार corroborative evidence हो सकती हैं। Original device, complete conversation और electronic evidence से संबंधित आवश्यक requirements को ध्यान में रखना चाहिए।
25. क्या केवल WhatsApp screenshot से घरेलू हिंसा सिद्ध हो सकती है?
एक screenshot की evidentiary value उसके context और authenticity पर निर्भर करती है। Original electronic record, source device और लागू evidentiary requirements महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
26. क्या घरेलू हिंसा याचिका में Google location history का इस्तेमाल किया जा सकता है?
जहां location data किसी specific factual allegation को corroborate करता है, वहां वह उपयोगी हो सकता है। लेकिन location history अकेले domestic violence सिद्ध नहीं करती; इसे अन्य evidence के साथ देखा जाना चाहिए।
27. क्या CCTV footage को घरेलू हिंसा याचिका के साथ लगाया जा सकता है?
यदि CCTV footage किसी relevant घटना को दिखाती है, तो वह supporting evidence हो सकती है। CCTV system में footage overwrite होने से पहले उसका lawful preservation महत्वपूर्ण हो सकता है।
28. क्या medical records के बिना physical violence का मामला कमजोर हो जाता है?
Medical records उपयोगी evidence हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक alleged incident में medical record उपलब्ध होना आवश्यक नहीं माना जा सकता। अन्य evidence, circumstances और witness material भी relevant हो सकते हैं।
29. क्या घरेलू हिंसा की घटना के बाद तुरंत पुलिस को फोन न करने की वजह बतानी चाहिए?
यदि complaint में delay है, तो उसके पीछे वास्तविक परिस्थितियों का उल्लेख उपयोगी हो सकता है—जैसे भय, परिवार का दबाव, reconciliation का प्रयास या सुरक्षा संबंधी चिंता। प्रत्येक मामले की explanation अलग होगी।
30. क्या FIR दर्ज न होने पर Domestic Violence Petition दायर की जा सकती है?
हां। Domestic Violence Act के अंतर्गत मिलने वाली remedies को हर मामले में पहले से FIR दर्ज होने पर निर्भर नहीं माना जाता। उपलब्ध facts के अनुसार Magistrate के समक्ष statutory reliefs मांगी जा सकती हैं।
31. क्या Domestic Violence Petition और divorce case एक साथ चल सकते हैं?
एक ही matrimonial relationship से जुड़े अलग-अलग legal proceedings परिस्थितियों के अनुसार एक साथ चल सकते हैं। हालांकि, सभी proceedings में material facts और previous litigation का सही disclosure महत्वपूर्ण है।
32. क्या divorce petition में लिखे facts Domestic Violence Petition में भी बताए जा सकते हैं?
यदि वही facts relevant हैं, तो उनका उल्लेख किया जा सकता है। दोनों pleadings में material facts के संबंध में consistency और complete disclosure महत्वपूर्ण है।
33. क्या पत्नी को नौकरी करने से रोकने का प्रयास monetary relief के दावे से जुड़ सकता है?
यदि alleged conduct महिला की आर्थिक स्वतंत्रता या earning capacity को प्रभावित करता है, तो वह factual circumstances के रूप में relevant हो सकता है। Monetary relief का वास्तविक entitlement statutory requirements और evidence पर निर्भर करेगा।
34. क्या पत्नी के अपने salary account को नियंत्रित करने की कोशिश economic abuse के रूप में लिखी जा सकती है?
यदि किसी व्यक्ति द्वारा महिला के financial resources पर अनुचित नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया गया है, तो परिस्थितियों के अनुसार उसे economic abuse के संदर्भ में plead किया जा सकता है। बैंक statements और transaction records उपयोगी हो सकते हैं।
35. क्या नौकरी करने वाली पत्नी भी Domestic Violence Act के तहत monetary relief मांग सकती है?
सिर्फ employed होने से महिला का monetary relief claim स्वतः समाप्त नहीं होता। न्यायालय relevant statutory provisions, actual financial circumstances और claimed loss/expenses को देख सकता है।
36. क्या पत्नी को घर के हर काम के लिए अकेले मजबूर करना Domestic Violence Petition में लिखा जा सकता है?
यदि घरेलू कार्य करवाना humiliation, coercion, exploitation या abusive conduct के व्यापक pattern का हिस्सा है, तो relevant facts बताए जा सकते हैं। याचिका में specific conduct और परिस्थितियां बताना अधिक उपयोगी है।
37. क्या गर्भावस्था के दौरान की गई प्रताड़ना को अलग से Domestic Violence Petition में बताया जा सकता है?
हां। गर्भावस्था के दौरान कथित physical, emotional, economic या अन्य abusive conduct से संबंधित specific incidents को chronology में शामिल किया जा सकता है।
38. क्या miscarriage से संबंधित medical documents Domestic Violence case में उपयोगी हो सकते हैं?
यदि miscarriage और alleged treatment/neglect के बीच factual connection का दावा किया गया है, तो medical records relevant हो सकते हैं। लेकिन medical document को उसकी वास्तविक सामग्री से आगे बढ़ाकर interpret नहीं करना चाहिए।
39. क्या पति द्वारा पत्नी को medical treatment के लिए पैसे न देना Domestic Violence Petition में लिखा जा सकता है?
यदि आवश्यक medical expenses से संबंधित आर्थिक सहायता जानबूझकर रोकी गई और facts statutory monetary/economic abuse provisions से संबंधित हैं, तो इसे relevant factual circumstance के रूप में plead किया जा सकता है।
40. क्या मानसिक प्रताड़ना के लिए अलग compensation मांगना संभव है?
Section 22 के अंतर्गत mental torture और emotional distress से संबंधित compensation का statutory provision है। Claim की राशि और entitlement मामले के facts तथा evidence पर निर्भर करेंगे।
41. क्या Domestic Violence Petition में बहुत बड़ी compensation amount मांगने से case मजबूत होता है?
नहीं। केवल अधिक राशि मांगना अपने आप case को मजबूत नहीं करता। Compensation का दावा facts, alleged injury, mental torture, emotional distress और उपलब्ध evidence के अनुरूप होना चाहिए।
42. क्या litigation expenses को Domestic Violence Petition में अलग से मांगा जा सकता है?
उचित परिस्थितियों में litigation-related monetary relief की मांग की जा सकती है, लेकिन precise relief statutory provisions और case facts के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।
43. क्या interim relief के लिए पूरी Domestic Violence case की hearing पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता है?
जरूरी नहीं। Section 23 interim और, परिस्थितियों में, ex parte relief से संबंधित है। तत्काल protection की आवश्यकता होने पर interim application प्रारंभिक stage पर विचार के लिए प्रस्तुत की जा सकती है।
44. क्या interim residence order और final residence relief अलग-अलग हो सकते हैं?
हां। Interim order तत्काल परिस्थितियों को address कर सकता है, जबकि final relief proceedings के evidence और merits के आधार पर तय हो सकती है। दोनों के उद्देश्य और stage अलग हो सकते हैं।
45. क्या Domestic Violence Petition में हर respondent के खिलाफ अलग-अलग घटना लिखनी चाहिए?
जहां कई respondents हैं, वहां प्रत्येक respondent की specific alleged role बताना अधिक स्पष्ट और legally useful होता है। केवल यह लिखना कि “सभी respondents ने प्रताड़ित किया” पर्याप्त factual detail नहीं दे सकता।
46. क्या विदेश में रहने वाले ससुराल पक्ष के व्यक्ति को Domestic Violence Petition में respondent बनाया जा सकता है?
यदि उसके विरुद्ध specific allegations और statutory basis मौजूद हैं, तो facts के अनुसार उसे respondent बनाया जा सकता है। केवल रिश्तेदार होना या विदेश में रहना अपने आप पर्याप्त आधार नहीं है।
47. क्या married sister-in-law के खिलाफ भी Domestic Violence Petition में allegations हो सकते हैं?
यदि उसके विरुद्ध specific conduct का factual basis है तो उसका उल्लेख किया जा सकता है। केवल उसका पति की बहन होना अपने आप liability स्थापित नहीं करता।
48. क्या Domestic Violence Petition में हर छोटी marital disagreement लिखनी चाहिए?
आवेदन में relevant facts और material incidents पर ध्यान देना बेहतर है। सामान्य वैवाहिक मतभेद और statutory domestic violence के बीच अंतर स्पष्ट रखना pleadings को अधिक focused बनाता है।
49. Domestic Violence Petition में “मुझे बहुत परेशान किया गया” के बजाय क्या लिखना चाहिए?
General allegation की जगह घटना का factual description देना बेहतर है—किसने क्या किया, कब या किस अवधि में किया, कहां किया, कौन उपस्थित था, क्या परिणाम हुआ और कौन-सा evidence उपलब्ध है। इससे court को specific allegations समझने में सहायता मिलती है।
50. Hindi Domestic Violence Petition को court-ready बनाने से पहले कौन-सी अंतिम जांच करनी चाहिए?
नाम, उम्र, विवाह की तारीख, addresses, domestic relationship, घटनाओं की chronology, respondents की specific roles, jurisdiction, मांगी गई reliefs, compensation/monetary amounts, pending cases और annexures को मूल documents से verify करना चाहिए। विशेष रूप से petition और interim application में facts और dates consistent होने चाहिए।

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